डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’
यह सबसे बुरी और गलत बात है कि अधिक मुकदमे दर्ज होने का कारण आला पुलिस अधिकारियों द्वारा थानाधिकारी से पूछा जाता है। जबकि इसके विपरीत होना तो यह चाहिये कि जिस थाने में अधिक मुकदमे दर्ज हुए हों, उस थाने को जनता के प्रति अधिक संवेदनशीलता का प्रमाण-पत्र दिया जाना चाहिये। आखिर अपराधियों से आहत जनता का कानूनी तौर पर उपचार प्रदान करने का काम करने के लिये ही तो पुलिस थानों की स्थापना की गयी है। जिन्हें अधिकतम कानूनी उपचार प्रदान करने के लिये, सवालों के घेरे में खड़ा करना किसी भी सूरत में न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। क्या कभी किसी उच्चतम स्तर के चिकित्सा अधिकारी ने नीचे के स्तर के चिकित्सक से यह सवाल किया है कि उसके द्वारा अधिक संख्या में बीमारों का उपचार क्यों किया गया? यदि नहीं तो पुलिस थाने से भी यह नहीं पूछा जाना चाहिये कि उसने अधिक फरियादियों की फरियाद दर्ज क्यों की? क्योंकि पुलिस भी तो आहत व्यक्ति को कानूनी उपचार प्रदान करती है। कानूनी उपचार भी जीवन के लिये उतना ही जरूरी है, जितना कि चिकित्सक द्वारा प्रदान किया जाने वाला शारीरिक या मानसिक उपचार।
